". मां कात्यायनी की कथा Skip to main content

मां सिद्धिदात्री की कथा

  मां सिद्धिदात्री – नवरात्रि के पावन अवसर पर मां आदि शक्ति की सिद्धि दात्री रूप की उपासना की जाती है   मां की उपासना से सभी सिद्धियां तथा तथा सभी सुखो की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के नवे मां आदि शक्ति के सिद्धिदात्रि स्‍वरूप की उपासना की जाती है ये सभी प्रकार की सिद्धि देने वाली होती है नवरात्रि के नवे दिन इनकी पूर्ण शास्‍त्रीय विधान से पूजा करने पर पूर्ण निष्‍ठा के साथ पूजा करने पर साधक को सभी प्रकार की सिद्धि प्राप्‍त होती है साधक के लिए ब्रम्‍हाण्‍ड में कुछ भी असाध्‍य नहीं रह जाता है ब्रम्‍हाण्‍ड पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामार्थ्‍य उसमें आ जाती है।   मार्कण्‍डेय पूराण के अनुसार अणिमा   महिमा   गरिमा   लघिमा   प्राप्ति   प्राकाम्‍य ईशित्‍व   और वशित्‍व   ये आठ प्रकार की सिद्धियां होती हैं।   ब्रम्‍हवैवर्तपुराण के अनुसार श्री कृष्‍ण जन्‍म खण्‍ड में इनकी संख्‍या अठारह बताई गई है 1 . अणिमा   2 . लघिमा   3 . प्राप्ति   4 . प्राकाम्‍य   5 . महिमा   6 .   ईशित्‍व , वाशित्‍व   7 .   सर्वकामावसायिता   8 .   सर्वज्ञत्‍व   9 .   दूरश्रवण   10 .   परकायप्रवेशन 11 .   वाक्सि

मां कात्यायनी की कथा


 


मां कात्‍यायनी 


नवरात्रि के पावन अवसर पर मां कात्‍यायनी की पूजा छठवें दिन होती है मां कात्‍यायनी की उपासना से रोग , सोक, दोस और पांप का निवारण करती है उनके समस्‍त पापों को काटती है अत:  हमें विधि विधान से मां कात्‍यायनी की उपासना करनी चाहिए।

 

आज नवरात्रि का छठा दिन मां कात्‍यायनी की पूजा को और आराधना को समर्पित है  माता कात्‍यायनी को मन की शक्ति कहा जाता है इनकी उपासना से इन्द्रियों पर विजय प्राप्‍त की जाती है इनकी उपासना से धर्म , अर्थ , काम  और मोक्ष चारो फलो की प्राप्ति होती है इनकी उपासना से रोग , सोक , संताप , ओर भय  नष्‍ट हो जाता है जन्‍मों के समस्‍त पाप भी नष्‍ट हो जाते है।

 

इन देवी को नवरात्रि के छठवें दिन पूजा जाता है विश्‍व प्रसिद्ध कात्‍य कुल में जन्‍में महर्षि कात्‍यायन ने परा शक्ति परा अम्‍बा की उपासना घोर तपस्‍या की थी की वे उन्‍हे पुत्री के रूप में प्राप्‍त हो। मां भगवती ने उनकी पुत्री के रूप में जन्‍म लिया। इसलिए यह देवी कात्‍यायनी कहलाती है इनका गुण शोधकार्य का है इसलिए वैज्ञानिक युग में इस देवी का बहुत महत्‍व है सारे कार्य इनकी ही क्रपा से पूरे होते है मां कात्‍यायनी अमोघ फलदायिनी हैं।

 

भगवान कृष्‍ण को पाने के लिए गोपियों ने ब्रज मण्‍डल में इन्‍ही की पूजा की थी और ये पूजा कलिंदी यमुना के तट पर की गई थी इस लिए इन्‍हे यहॉं की अधिष्‍ठात्री देवी भी कहा जाता है इनका शरीर अत्‍यतं भव्‍य और दिव्‍य है ये स्‍वर्ण के समान चमकीला हैं

 

इनकी चार भुजाएं है। दांई तरफ का ऊपर वाली हॉंथ अभयमुद्रा में है और नीचे वाली भुजा वर मुद्रा में है तथा बांई हॉंथ की ऊपर वाली भुजा में तलवार तथा नीचे वाली भुजा में कमल पुष्‍प है इनका वाहन सिेंह है इनकी उपासना से धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष चारो पुरूषार्थो की प्राप्ति होती है सभी रोग , शोक  और संताप से मुक्ति प्राप्‍त होती है  इन देवी की उपासना से सभी पांप नष्‍ट हो जाते है भक्‍त को परम पद की प्राप्ति होती है अत: भक्‍त को पूरी श्रद्धा से इनकी पूजा उपासना करनी चाहिए।

Comments

Popular posts from this blog

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाए

इम्‍युनिटि जो कि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है अर्थात शरीर में रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है जिसको हम रोग प्रतिरोधक क्षमता या प्रतिरक्षा कहा जाता है ये किसी भी प्रकार के सूक्ष्‍मजीव जैसे – रोगो को पैदा करने वाले वायरस , बैक्‍टीरिया   आदि , से शरीर को लड़ने की क्षमता देते है ,  ये ही हमारे शरीर को रोगो से लड़ने की शक्ति देती है । शोधकर्ताओं का मनना है की शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कुछ भोज्‍य पदार्थ बहुत अच्‍छे होते है ताजे फल और सब्जियों में काफी मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट होते है जो शरीर को अनेक बीमारियों से बचाये रहते है। शोधकर्ताओं का एैसा मानना है की आहार , व्‍यायाम , उम्र मानसिक तनाव का भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है सामान्‍य तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता को अच्‍छा तथा एक स्‍वस्‍थ्‍य जीवन शैली को बनाये रखने के लिये एक अच्‍छा तरीका है आज इस लेख के माध्‍यम से हम विभिन्‍न भोज्‍य पदार्थो से इम्‍युनिटि को अच्‍छा रखने जानकारी दे रहे है।   स्‍वस्‍थ्‍य जीवन शैली से इम्‍युनिटि को बढ़ाऐं –   इम्‍युनिटि को अपने शरीर में अच्‍छा रखने के ल

मां सिद्धिदात्री की कथा

  मां सिद्धिदात्री – नवरात्रि के पावन अवसर पर मां आदि शक्ति की सिद्धि दात्री रूप की उपासना की जाती है   मां की उपासना से सभी सिद्धियां तथा तथा सभी सुखो की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के नवे मां आदि शक्ति के सिद्धिदात्रि स्‍वरूप की उपासना की जाती है ये सभी प्रकार की सिद्धि देने वाली होती है नवरात्रि के नवे दिन इनकी पूर्ण शास्‍त्रीय विधान से पूजा करने पर पूर्ण निष्‍ठा के साथ पूजा करने पर साधक को सभी प्रकार की सिद्धि प्राप्‍त होती है साधक के लिए ब्रम्‍हाण्‍ड में कुछ भी असाध्‍य नहीं रह जाता है ब्रम्‍हाण्‍ड पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामार्थ्‍य उसमें आ जाती है।   मार्कण्‍डेय पूराण के अनुसार अणिमा   महिमा   गरिमा   लघिमा   प्राप्ति   प्राकाम्‍य ईशित्‍व   और वशित्‍व   ये आठ प्रकार की सिद्धियां होती हैं।   ब्रम्‍हवैवर्तपुराण के अनुसार श्री कृष्‍ण जन्‍म खण्‍ड में इनकी संख्‍या अठारह बताई गई है 1 . अणिमा   2 . लघिमा   3 . प्राप्ति   4 . प्राकाम्‍य   5 . महिमा   6 .   ईशित्‍व , वाशित्‍व   7 .   सर्वकामावसायिता   8 .   सर्वज्ञत्‍व   9 .   दूरश्रवण   10 .   परकायप्रवेशन 11 .   वाक्सि

मां शैलपुत्री की कथा 2020

      मां शैलपुत्री की कथा  नवरात्रि के पावन पर्व में प्रथम दिन  मां शैलपुत्री की कथा www.jankarimy.com जगदम्‍बेश्‍वरी आदि शक्ति के प्रथम स्‍वरूप की कथा जो शैलपुत्री के रूप में जाना जाता है मॉं के ध्‍यान और उपासना सभी कस्‍टो का अंत और पुन्‍य का उदय होता है शास्‍त्रो के अनुसार नवरात्रि में मॉं के अलग अलग स्‍वरूपो की पूजा की जाति है प्रथम दिन मॉं शैल पुत्री की पूजा की जाति है मॉं शैलपुत्री की कथा इस प्रकार एक बाद सति जी के पिता दक्ष ने यज्ञ किया उसमें उन्‍होने सभी देवी ओर देवताओं को आमंत्रण दिया लेकिन शिव जी को कोई निमंत्रण नहीं दिया गया क्‍योंकि दक्ष शिव जी किसी कारण वश ईर्शा रखते थे।   सति जी और शिव जी कैलाश में बैठे थे तब उन्‍होने देवताओं के विमानो को जाते हुऐ देखा उन्‍होने शिव जी से पूछा की ये सब कहा जा रहे है शिव जी ने बताया की आपके पिता ने यज्ञ का आयोजन किया हुआ है ये सब उसी यज्ञ में अपना भाग लेने जा रहे है सति जी ने कहा की हमें भी चलना चाहिये तब शिव जी ने बोला की आपके पिता मुझसे बैर मानते है और उन्‍होने हमें आमंत्रित भी नहीं किया हमें वहॉं नहीं जाना चाहिए ,    पर सति ज