". रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाए Skip to main content

मां सिद्धिदात्री की कथा

  मां सिद्धिदात्री – नवरात्रि के पावन अवसर पर मां आदि शक्ति की सिद्धि दात्री रूप की उपासना की जाती है   मां की उपासना से सभी सिद्धियां तथा तथा सभी सुखो की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के नवे मां आदि शक्ति के सिद्धिदात्रि स्‍वरूप की उपासना की जाती है ये सभी प्रकार की सिद्धि देने वाली होती है नवरात्रि के नवे दिन इनकी पूर्ण शास्‍त्रीय विधान से पूजा करने पर पूर्ण निष्‍ठा के साथ पूजा करने पर साधक को सभी प्रकार की सिद्धि प्राप्‍त होती है साधक के लिए ब्रम्‍हाण्‍ड में कुछ भी असाध्‍य नहीं रह जाता है ब्रम्‍हाण्‍ड पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामार्थ्‍य उसमें आ जाती है।   मार्कण्‍डेय पूराण के अनुसार अणिमा   महिमा   गरिमा   लघिमा   प्राप्ति   प्राकाम्‍य ईशित्‍व   और वशित्‍व   ये आठ प्रकार की सिद्धियां होती हैं।   ब्रम्‍हवैवर्तपुराण के अनुसार श्री कृष्‍ण जन्‍म खण्‍ड में इनकी संख्‍या अठारह बताई गई है 1 . अणिमा   2 . लघिमा   3 . प्राप्ति   4 . प्राकाम्‍य   5 . महिमा   6 .   ईशित्‍व , वाशित्‍व   7 .   सर्वकामावसायिता   8 .   सर्वज्ञत्‍व   9 .   दूरश्रवण   10 .   परकायप्रवेशन 11 .   वाक्सि

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाए






इम्‍युनिटि जो कि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है अर्थात शरीर में रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है जिसको हम रोग प्रतिरोधक क्षमता या प्रतिरक्षा कहा जाता है ये किसी भी प्रकार के सूक्ष्‍मजीव जैसे रोगो को पैदा करने वाले वायरस , बैक्‍टीरिया  आदि , से शरीर को लड़ने की क्षमता देते है ये ही हमारे शरीर को रोगो से लड़ने की शक्ति देती है ।


शोधकर्ताओं का मनना है की शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कुछ भोज्‍य पदार्थ बहुत अच्‍छे होते है ताजे फल और सब्जियों में काफी मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट होते है जो शरीर को अनेक बीमारियों से बचाये रहते है। शोधकर्ताओं का एैसा मानना है की आहार , व्‍यायाम , उम्र मानसिक तनाव का भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है सामान्‍य तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता को अच्‍छा तथा एक स्‍वस्‍थ्‍य जीवन शैली को बनाये रखने के लिये एक अच्‍छा तरीका है आज इस लेख के माध्‍यम से हम विभिन्‍न भोज्‍य पदार्थो से इम्‍युनिटि को अच्‍छा रखने जानकारी दे रहे है।

 

स्‍वस्‍थ्‍य जीवन शैली से इम्‍युनिटि को बढ़ाऐं

 

इम्‍युनिटि को अपने शरीर में अच्‍छा रखने के लिए एक स्‍वस्‍थ जीवन शैली अपनाना पड़ता है इम्‍युनिटि बढ़ाने लिये एक सही दिशा निर्देश में चलना पड़ता है प्रतिरोधक क्षमता के साथ साथ आपके शरीर के और हिस्‍से भी इसके सुझाव से सही काम करते है

सुझाव इस प्रकार हैं जैसे

·       धूम्रपान न करें।

·       पोषित सब्जियां , फल , अनाज और कम संर्तप्‍त वसा वला आहार खाएं।

·       प्रतिदिन व्‍यायाम करें।

·       अपने वजन को संतुलित रखें।

·       अपने ब्‍लड प्रेशर को सामान्‍य रखें।

·       यदि आप शराब पीते है तो ध्‍यान रखे की उसका सेवन कम से कम करना है।

·       पूर्ण तरीकेू से नीदं लें।

·       खाना खाने से पहले अपने हॉथों को जरूर धोएं।

·       खाना बनाने से पहले सब्जियों को अच्‍छी तरह से धो लें जिससे की आपको किसी भी तरह का संक्रमण न हो।

·       चिकित्‍सा की जॉंच नियमित रूप से करवाते रहें।

 

कुछ पोषक तत्‍वो को भोजन में सामिल करके अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाऐं

 

हमारे भोजन में होने वाले कुछ पोषक तत्‍व हमारे शरीर के इम्‍यून सिस्‍टम की क्षमता को बढ़ा सकते है।

विटामिन A और E –  विटामिन A एवं E एक प्रकार शक्तिशाली एंटीऑक्‍सीडेंट है जो इंफ्लमैशन ( सूजन ) को रोकते है और साथ ही शरीर में रोगो से लड़ने वाली कोशिकाओं को भी बढ़ाते है।

  

विटामिन A की प्राप्ति के लिए इन भाज्‍य पदार्थो का सेवन करें

·       सब्जियाँ गाजर , पीले व लाल शिमला मिर्च , शकरकंद

·       फल आम , खुबानी , संतरा , पपीता , खरबूजा , चकोतरा

·       डेयरी उत्‍पादन -  दूध से बने पदार्थ , पनीर  , दही , आदि

 

विटामिन E –

·       बादाम  मूंगफली ,  कीवी  खुबानी , हेजलनट्स  जैतून  सूरजमुखी के बीज

·       वनस्‍पति तेल जैसे गेहूं के बीज का तेल , सूरजमुखी का तेल , सोयाबीन का तेल , बादाम का तेल

·       सरसो एवं शलगम का साग , ब्रोकाली  

 

विटामिन C – विटामिन C में एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो की शरीर में फ्री रेडिकल्‍स के कारण होने वाली क्षति एवं संक्रमण से भी बचाते हैं। विटामिन सी से युक्‍त भोज्‍य पदार्थ जैसे

·       फल नीबू , संतरा , अंगूर , पपीता , स्‍ट्रॉबेरी , आंवला

·       सब्जियां ब्रोकाली , हरी मिर्च , लाल एवं पीली शिमला मिर्च , टमाटर

 

विटामिन D – कई शोध से पता चला है की विटामिन डी से कई वायरल संक्रमण और श्र्वांस सम्‍बन्‍धी संक्रमण को रोकने में काफी लाभ दायक होते है। विटामिन डी के इनका सेवन करें

·       मशरूम

·       विटामिन डी फोर्टिफिकेशन वाले भोज्‍य पदार्थ

·       सूर्य की रोशनी से भी हमें विटामिन डी की हमें प्राप्ति होती है

 

आयरन ( लौह तत्‍व ) -  आयरन की कमी से इम्‍यूनोकोम्‍प्रोमाइज की स्थिति आ जाती है जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी हो जाती है इसलिए भोजन में आयरन की मात्रा भरपूर होनी चाहिऐ।

इसके भोज्‍य पदार्थो का सेवन करें

·       चिकन व कम वसा वाला मांस ,

·       पालक , ब्रोकोली , सलाद पत्‍ता

·       सेम , मटर  , अंकुरित , फलियां , अनाज

·       गुड़ , खजूर

·       भोजन को पकाने लिए लोहे के बर्तन का उपयोग करें

 

सेलेनियम इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल के प्रभाव तथा शरीर में होने संक्रमण से बचाते है इसकी प्राप्ति के लिये भोज्‍य पदार्थो का सेवन करें

·       झींगा , चिकन , टूना मछली

·       केले

·       गेहूं की वनी रोटी या ब्रेड  चावल

·       आलू  और  मशरूम

·       चिया  सीड्स

 

प्रोबायोटिक प्रोबायोटिक यानि गट बैक्‍टीरिया , ये वो बैक्‍टीरिया है जो हमारे पेट में पाचन को सही बनाए रखने और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देते है , प्रोबायोटिक्‍स के लिए आपको इन पदार्थो का सेवन करना करें

 

·       डेयरी आधारित उत्‍पाद दूध , पनीर , दही , दूध पाउडर  , छाछ , याकुल्‍ट , काफिर

·       सोया दूध और उसके उत्‍पाद

·       प्रोबायोटिक्‍स से युक्‍त अनाज

 

जिंक -  ये श्र्वेत रक्‍त कोशिकाओं को शरीर में बढ़ावा देता है जो संक्रमण से हमारे शरीर का बचाव करता है इसकी प्राप्ति के लिए भोज्‍य पदार्थ

·       लाल मांस , चिकन  और अंडा

·       सीफूड जैसे केकड़ा , सीप और झींगा मछली

·       दूध व दूध से बने पदार्थ

·       छोले व अन्‍य फलियां

·       नट्स एवं बीज जैसे  बादाम , मूंगफली , तिल के बीज

 

 

ओमेगा 3 -  ये प्रोबायोटिक्‍स के कार्य को प्रभावी बनाते है जिससे हमारा पेट स्‍वस्‍थ रहता है और इम्‍यून सिस्‍टम भी अच्‍छा रहता है इसके प्राप्ति के लिये भोज्‍य  पदार्थ

·       मछली का तेल

·       चिया सीड्स , अलसी के बीज और अखरोट

·       अलसी का तेल और सोयाबीन का तेल

 

संतुलित आहार से अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाऐं

 

 

संतलित आहार प्रति दिन पर्याप्‍त ऊर्जा लेने के लिए हमें अपने भोज्‍य पदार्थ में इनके सामिल करने के अलावा हमें संतुलित आहार लेना बहुत ही आवश्‍यक है जिससे आप अपनी दैनिक पोषक तत्‍वों की कमी को पूरा करें एवं जिससे आपको पर्याप्‍त पोषण प्राप्‍त होता रहे और आपकी शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र भी अच्‍छा रहे। आप संतुलित आहार के लिये भोजन में साबुत अनाज , बिना छिलके की दाल , रंगबिरंगी सब्जियाँ एवं फल शामिल करें । दूध या दूध से बने पदार्थो को नियमित सेवन करें , साथ थोड़ी मात्रा में बादाम , अखरोट और मूगंफल भी मिलाऐं साथ ही 2 से 3 लीटर पानी भी पीये।

इम्‍यून सिस्‍टम को सही करने के लिए कुछ पदार्थ -  हल्‍दी वाला दूध जिसे गोल्‍ड मिल्‍क भी कहते है जिसे भोजन के बीच में लेने की कोशिश करें। इसके अलावा ग्रीन टी ले जिसमें काली मिर्च , अदरक , इलाइची डाल सकते है जिससे आप दो पोषक तत्‍वो का सेवन कर मिलेगें , इसमें फ्लैवोनाइड उपस्थित होता है जो हमारे इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत करता है।

 

लहसुन से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाऐं लहसुन हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिये अच्‍छा पदार्थ है लहसुन एंटी ऑक्‍सीडेंट से भरपूर होता है जो हमारे शरीर को कई प्रकार के रोगो से लड़ने की क्षमता देता है लहसुन में एल्सिन नामक एक तत्‍व होता है जो शरीर में कई प्रकार के संक्रमण तथा बैक्‍टीरिया से लड़ने की क्षमता देता है लहसुन के सेवन से अल्‍सर और कैंसर जैसे रोगो से बचाव होता है।   

 

ग्रीन टी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाऐं ग्रीन टी एंटीऑक्‍सीडेंट से भरपूर होती है जो की शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ बजन और मोटापे को भी कम करती है इसमें पॉनीफेनोल होता है जो शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ता है और इंफ्लमैशन को भी कम करता है। पाचन क्रिया तथा मष्तिक को सही रखने में भी यह मदद करता है।

 

भोजन जो प्रतिरोधक क्षमता का बूस्‍टर है अलसी -  अलसी हमारे शरीर के लिये एक अच्‍छा इम्‍युनिटी बूस्‍टर है हमारे शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए इसमे बहुत से गुण होते है अलसी में अल्‍फा लिनोलेनिक एसिड , ओमेगा -3 और फैटी एसिड होता है जो की हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

इम्‍यून सिस्‍टम मसाले और हर्ब्‍स से कैसे सुधारे -  हल्‍दी , अदरक , काली मिर्च , मेथी दाना , दालचीनी , इलायची , लौंग , ऑरेगैनो इनमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट्स शरीर में रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते है और इनको काढ़ा  चटनी  चाय में ऊपर से डाल कर निम्‍न तरिकों से इसका सेवन किया जाता है।

 

दालचीनी से प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार -  दालचीनी में एंटीऑक्‍सीडेंट भरपूर होता है जो शरीर में खून को जमने से रोकता है और साथ ही हानिकारक बैक्‍टीरिया  को बढ़ने से भी रोकता है दालचीनी शरीर में शुगर और कोलेस्‍ट्रॉल को भी नियंत्रित क‍रता है।

 

हल्‍दी प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिऐ बहुत ही आवश्‍यक हल्‍दी में एंटी ऑक्‍सीडेंट से भरपूर होती है जो की शरीर की इम्‍यून सिस्‍टम को शक्ति को बढ़ाती है जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अच्‍छी होती है और हल्‍दी शरीर को स्‍वस्‍थ भी करती है हल्‍दी में मौजूद गुणों के कारण यह कैंसर एवं अलजाइमर जैसी बीमारियों से भी रक्षा करता है इसके साथ ही इसमें उपस्थित करक्‍यूमिन नामक तत्‍व शरीर में शुगर के स्‍तर को संतुलित रखता है जिससे मेटाबोलिज्‍म सही रह सके और शरीर और व्‍यक्ति मधुमेह जैसी बीमारियों से दूर रह सके।

 

तनाव से प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव  -  तनाव से दूर रहें जब हम तनाव लेते है तौ इससे हमारे शरीर में एैसे हार्मोंस  स्रावित होते है जो की हमारे शरीर के इम्‍यून सिस्‍टम को कमजोर करते है इससे बचने के लिए हमें प्रतिदिन ध्‍यान और योग करना चाहिए , 6  से 7 घण्‍टे प्रतिदिन पर्याप्‍त नींद लेनी चाहिए ,  अपने दोस्‍तो और घर में लोगों से बात करती चाहिए।

 

  

 इम्‍युनिटि जो कि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है अर्थात शरीर में रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है जिसको हम रोग प्रतिरोधक क्षमता या प्रतिरक्षा कहा जाता है ये किसी भी प्रकार के सूक्ष्‍मजीव जैसे रोगो को पैदा करने वाले वायरस , बैक्‍टीरिया  आदि , से शरीर को लड़ने की क्षमता देते है ये ही हमारे शरीर को रोगो से लड़ने की शक्ति देती है ।

शोधकर्ताओं का मनना है की शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कुछ भोज्‍य पदार्थ बहुत अच्‍छे होते है ताजे फल और सब्जियों में काफी मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट होते है जो शरीर को अनेक बीमारियों से बचाये रहते है। शोधकर्ताओं का एैसा मानना है की आहार , व्‍यायाम , उम्र मानसिक तनाव का भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है सामान्‍य तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता को अच्‍छा तथा एक स्‍वस्‍थ्‍य जीवन शैली को बनाये रखने के लिये एक अच्‍छा तरीका है आज इस लेख के माध्‍यम से हम विभिन्‍न भोज्‍य पदार्थो से इम्‍युनिटि को अच्‍छा रखने जानकारी दे रहे है।

 

स्‍वस्‍थ्‍य जीवन शैली से इम्‍युनिटि को बढ़ाऐं

 

इम्‍युनिटि को अपने शरीर में अच्‍छा रखने के लिए एक स्‍वस्‍थ जीवन शैली अपनाना पड़ता है इम्‍युनिटि बढ़ाने लिये एक सही दिशा निर्देश में चलना पड़ता है प्रतिरोधक क्षमता के साथ साथ आपके शरीर के और हिस्‍से भी इसके सुझाव से सही काम करते है

सुझाव इस प्रकार हैं जैसे

·       धूम्रपान न करें।

·       पोषित सब्जियां , फल , अनाज और कम संर्तप्‍त वसा वला आहार खाएं।

·       प्रतिदिन व्‍यायाम करें।

·       अपने वजन को संतुलित रखें।

·       अपने ब्‍लड प्रेशर को सामान्‍य रखें।

·       यदि आप शराब पीते है तो ध्‍यान रखे की उसका सेवन कम से कम करना है।

·       पूर्ण तरीकेू से नीदं लें।

·       खाना खाने से पहले अपने हॉथों को जरूर धोएं।

·       खाना बनाने से पहले सब्जियों को अच्‍छी तरह से धो लें जिससे की आपको किसी भी तरह का संक्रमण न हो।

·       चिकित्‍सा की जॉंच नियमित रूप से करवाते रहें।

 

कुछ पोषक तत्‍वो को भोजन में सामिल करके अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाऐं

 

हमारे भोजन में होने वाले कुछ पोषक तत्‍व हमारे शरीर के इम्‍यून सिस्‍टम की क्षमता को बढ़ा सकते है।

विटामिन A और E –  विटामिन A एवं E एक प्रकार शक्तिशाली एंटीऑक्‍सीडेंट है जो इंफ्लमैशन ( सूजन ) को रोकते है और साथ ही शरीर में रोगो से लड़ने वाली कोशिकाओं को भी बढ़ाते है।

  

विटामिन A की प्राप्ति के लिए इन भाज्‍य पदार्थो का सेवन करें

·       सब्जियाँ गाजर , पीले व लाल शिमला मिर्च , शकरकंद

·       फल आम , खुबानी , संतरा , पपीता , खरबूजा , चकोतरा

·       डेयरी उत्‍पादन -  दूध से बने पदार्थ , पनीर  , दही , आदि

 

विटामिन E –

·       बादाम  मूंगफली ,  कीवी  खुबानी , हेजलनट्स  जैतून  सूरजमुखी के बीज

·       वनस्‍पति तेल जैसे गेहूं के बीज का तेल , सूरजमुखी का तेल , सोयाबीन का तेल , बादाम का तेल

·       सरसो एवं शलगम का साग , ब्रोकाली  

 

विटामिन C –  विटामिन C में एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो की शरीर में फ्री रेडिकल्‍स के कारण होने वाली क्षति एवं संक्रमण से भी बचाते हैं। विटामिन सी से युक्‍त भोज्‍य पदार्थ जैसे

·       फल नीबू , संतरा , अंगूर , पपीता , स्‍ट्रॉबेरी , आंवला

·       सब्जियां ब्रोकाली , हरी मिर्च , लाल एवं पीली शिमला मिर्च , टमाटर

 

विटामिन D – कई शोध से पता चला है की विटामिन डी से कई वायरल संक्रमण और श्र्वांस सम्‍बन्‍धी संक्रमण को रोकने में काफी लाभ दायक होते है। विटामिन डी के इनका सेवन करें

·       मशरूम

·       विटामिन डी फोर्टिफिकेशन वाले भोज्‍य पदार्थ

·       सूर्य की रोशनी से भी हमें विटामिन डी की हमें प्राप्ति होती है

 

आयरन ( लौह तत्‍व ) -  आयरन की कमी से इम्‍यूनोकोम्‍प्रोमाइज की स्थिति आ जाती है जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी हो जाती है इसलिए भोजन में आयरन की मात्रा भरपूर होनी चाहिऐ।

इसके भोज्‍य पदार्थो का सेवन करें

·       चिकन व कम वसा वाला मांस ,

·       पालक , ब्रोकोली , सलाद पत्‍ता

·       सेम , मटर  , अंकुरित , फलियां , अनाज

·       गुड़ , खजूर

·       भोजन को पकाने लिए लोहे के बर्तन का उपयोग करें

 

सेलेनियम    इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल के प्रभाव तथा शरीर में होने संक्रमण से बचाते है इसकी प्राप्ति के लिये भोज्‍य पदार्थो का सेवन करें

·       झींगा , चिकन , टूना मछली

·       केले

·       गेहूं की वनी रोटी या ब्रेड  चावल

·       आलू  और  मशरूम

·       चिया  सीड्स

 

प्रोबायोटिक प्रोबायोटिक यानि गट बैक्‍टीरिया , ये वो बैक्‍टीरिया है जो हमारे पेट में पाचन को सही बनाए रखने और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देते है , प्रोबायोटिक्‍स के लिए आपको इन पदार्थो का सेवन करना करें

 

·       डेयरी आधारित उत्‍पाद दूध , पनीर , दही , दूध पाउडर  , छाछ , याकुल्‍ट , काफिर

·       सोया दूध और उसके उत्‍पाद

·       प्रोबायोटिक्‍स से युक्‍त अनाज

 

जिंक -  ये श्र्वेत रक्‍त कोशिकाओं को शरीर में बढ़ावा देता है जो संक्रमण से हमारे शरीर का बचाव करता है इसकी प्राप्ति के लिए भोज्‍य पदार्थ

·       लाल मांस , चिकन  और अंडा

·       सीफूड जैसे केकड़ा , सीप और झींगा मछली

·       दूध व दूध से बने पदार्थ

·       छोले व अन्‍य फलियां

·       नट्स एवं बीज जैसे  बादाम , मूंगफली , तिल के बीज

 

 

ओमेगा 3 -  ये प्रोबायोटिक्‍स के कार्य को प्रभावी बनाते है जिससे हमारा पेट स्‍वस्‍थ रहता है और इम्‍यून सिस्‍टम भी अच्‍छा रहता है इसके प्राप्ति के लिये भोज्‍य  पदार्थ

·       मछली का तेल

·       चिया सीड्स , अलसी के बीज और अखरोट

·       अलसी का तेल और सोयाबीन का तेल

 

संतुलित आहार से अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाऐं

 

 

संतलित आहार    प्रति दिन पर्याप्‍त ऊर्जा लेने के लिए हमें अपने भोज्‍य पदार्थ में इनके सामिल करने के अलावा हमें संतुलित आहार लेना बहुत ही आवश्‍यक है जिससे आप अपनी दैनिक पोषक तत्‍वों की कमी को पूरा करें एवं जिससे आपको पर्याप्‍त पोषण प्राप्‍त होता रहे और आपकी शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र भी अच्‍छा रहे। आप संतुलित आहार के लिये भोजन में साबुत अनाज , बिना छिलके की दाल , रंगबिरंगी सब्जियाँ एवं फल शामिल करें । दूध या दूध से बने पदार्थो को नियमित सेवन करें , साथ थोड़ी मात्रा में बादाम , अखरोट और मूगंफल भी मिलाऐं साथ ही 2 से 3 लीटर पानी भी पीये।

इम्‍यून सिस्‍टम को सही करने के लिए कुछ पदार्थ -  हल्‍दी वाला दूध जिसे गोल्‍ड मिल्‍क भी कहते है जिसे भोजन के बीच में लेने की कोशिश करें। इसके अलावा ग्रीन टी ले जिसमें काली मिर्च , अदरक , इलाइची डाल सकते है जिससे आप दो पोषक तत्‍वो का सेवन कर मिलेगें , इसमें फ्लैवोनाइड उपस्थित होता है जो हमारे इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत करता है।

 

लहसुन से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाऐं लहसुन हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिये अच्‍छा पदार्थ है लहसुन एंटी ऑक्‍सीडेंट से भरपूर होता है जो हमारे शरीर को कई प्रकार के रोगो से लड़ने की क्षमता देता है लहसुन में एल्सिन नामक एक तत्‍व होता है जो शरीर में कई प्रकार के संक्रमण तथा बैक्‍टीरिया से लड़ने की क्षमता देता है लहसुन के सेवन से अल्‍सर और कैंसर जैसे रोगो से बचाव होता है।   

 

ग्रीन टी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाऐं ग्रीन टी एंटीऑक्‍सीडेंट से भरपूर होती है जो की शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ बजन और मोटापे को भी कम करती है इसमें पॉनीफेनोल होता है जो शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ता है और इंफ्लमैशन को भी कम करता है। पाचन क्रिया तथा मष्तिक को सही रखने में भी यह मदद करता है।

 

भोजन जो प्रतिरोधक क्षमता का बूस्‍टर है अलसी -  अलसी हमारे शरीर के लिये एक अच्‍छा इम्‍युनिटी बूस्‍टर है हमारे शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के लिए इसमे बहुत से गुण होते है अलसी में अल्‍फा लिनोलेनिक एसिड , ओमेगा -3 और फैटी एसिड होता है जो की हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

इम्‍यून सिस्‍टम मसाले और हर्ब्‍स से कैसे सुधारे -  हल्‍दी , अदरक , काली मिर्च , मेथी दाना , दालचीनी , इलायची , लौंग , ऑरेगैनो इनमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट्स शरीर में रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते है और इनको काढ़ा  चटनी  चाय में ऊपर से डाल कर निम्‍न तरिकों से इसका सेवन किया जाता है।

 

दालचीनी से प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार -  दालचीनी में एंटीऑक्‍सीडेंट भरपूर होता है जो शरीर में खून को जमने से रोकता है और साथ ही हानिकारक बैक्‍टीरिया  को बढ़ने से भी रोकता है दालचीनी शरीर में शुगर और कोलेस्‍ट्रॉल को भी नियंत्रित क‍रता है।

 

हल्‍दी प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिऐ बहुत ही आवश्‍यक हल्‍दी में एंटी ऑक्‍सीडेंट से भरपूर होती है जो की शरीर की इम्‍यून सिस्‍टम को शक्ति को बढ़ाती है जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अच्‍छी होती है और हल्‍दी शरीर को स्‍वस्‍थ भी करती है हल्‍दी में मौजूद गुणों के कारण यह कैंसर एवं अलजाइमर जैसी बीमारियों से भी रक्षा करता है इसके साथ ही इसमें उपस्थित करक्‍यूमिन नामक तत्‍व शरीर में शुगर के स्‍तर को संतुलित रखता है जिससे मेटाबोलिज्‍म सही रह सके और शरीर और व्‍यक्ति मधुमेह जैसी बीमारियों से दूर रह सके।

 

तनाव से प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव  -  तनाव से दूर रहें जब हम तनाव लेते है तौ इससे हमारे शरीर में एैसे हार्मोंस  स्रावित होते है जो की हमारे शरीर के इम्‍यून सिस्‍टम को कमजोर करते है इससे बचने के लिए हमें प्रतिदिन ध्‍यान और योग करना चाहिए , 6  से 7 घण्‍टे प्रतिदिन पर्याप्‍त नींद लेनी चाहिए ,  अपने दोस्‍तो और घर में लोगों से बात करती चाहिए।

 

  

 

 

 

 

 

 

 

  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

  

 

 

 

 

 

 

 

 


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  मां सिद्धिदात्री – नवरात्रि के पावन अवसर पर मां आदि शक्ति की सिद्धि दात्री रूप की उपासना की जाती है   मां की उपासना से सभी सिद्धियां तथा तथा सभी सुखो की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के नवे मां आदि शक्ति के सिद्धिदात्रि स्‍वरूप की उपासना की जाती है ये सभी प्रकार की सिद्धि देने वाली होती है नवरात्रि के नवे दिन इनकी पूर्ण शास्‍त्रीय विधान से पूजा करने पर पूर्ण निष्‍ठा के साथ पूजा करने पर साधक को सभी प्रकार की सिद्धि प्राप्‍त होती है साधक के लिए ब्रम्‍हाण्‍ड में कुछ भी असाध्‍य नहीं रह जाता है ब्रम्‍हाण्‍ड पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामार्थ्‍य उसमें आ जाती है।   मार्कण्‍डेय पूराण के अनुसार अणिमा   महिमा   गरिमा   लघिमा   प्राप्ति   प्राकाम्‍य ईशित्‍व   और वशित्‍व   ये आठ प्रकार की सिद्धियां होती हैं।   ब्रम्‍हवैवर्तपुराण के अनुसार श्री कृष्‍ण जन्‍म खण्‍ड में इनकी संख्‍या अठारह बताई गई है 1 . अणिमा   2 . लघिमा   3 . प्राप्ति   4 . प्राकाम्‍य   5 . महिमा   6 .   ईशित्‍व , वाशित्‍व   7 .   सर्वकामावसायिता   8 .   सर्वज्ञत्‍व   9 .   दूरश्रवण   10 .   परकायप्रवेशन 11 .   वाक्सि

मां शैलपुत्री की कथा 2020

      मां शैलपुत्री की कथा  नवरात्रि के पावन पर्व में प्रथम दिन  मां शैलपुत्री की कथा www.jankarimy.com जगदम्‍बेश्‍वरी आदि शक्ति के प्रथम स्‍वरूप की कथा जो शैलपुत्री के रूप में जाना जाता है मॉं के ध्‍यान और उपासना सभी कस्‍टो का अंत और पुन्‍य का उदय होता है शास्‍त्रो के अनुसार नवरात्रि में मॉं के अलग अलग स्‍वरूपो की पूजा की जाति है प्रथम दिन मॉं शैल पुत्री की पूजा की जाति है मॉं शैलपुत्री की कथा इस प्रकार एक बाद सति जी के पिता दक्ष ने यज्ञ किया उसमें उन्‍होने सभी देवी ओर देवताओं को आमंत्रण दिया लेकिन शिव जी को कोई निमंत्रण नहीं दिया गया क्‍योंकि दक्ष शिव जी किसी कारण वश ईर्शा रखते थे।   सति जी और शिव जी कैलाश में बैठे थे तब उन्‍होने देवताओं के विमानो को जाते हुऐ देखा उन्‍होने शिव जी से पूछा की ये सब कहा जा रहे है शिव जी ने बताया की आपके पिता ने यज्ञ का आयोजन किया हुआ है ये सब उसी यज्ञ में अपना भाग लेने जा रहे है सति जी ने कहा की हमें भी चलना चाहिये तब शिव जी ने बोला की आपके पिता मुझसे बैर मानते है और उन्‍होने हमें आमंत्रित भी नहीं किया हमें वहॉं नहीं जाना चाहिए ,    पर सति ज